Sarve Vikas Sansthan सर्व विकास संस्थान

  • देश के धार्मिक, सामाजिक, नैतिक, शारीरिक व आर्थिक उत्थान हेतु अथक प्रयत्न करना व भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार करना।
  •  स्वयं सहायता समूहों का निर्माण व संचालन करना तथा पुराने बने स्वयं सहायता समूहों को साथ जोड़कर संचालित करना या संचालन मे सहयोग करना। 

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बेरोजगारी को समाप्त करना व ग्रामीण स्तर पर छोटे उद्योग संचालित करवाना और किसानो को उनसे जोडकर उनकी आय में वर्द्धी करना स्वम सहायता समूह व जन सेवा केंद्रो को साथ जोडकर सभी की आय में वर्द्धी का प्रयत्न करना  

 
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महऋर्षि दयानंद सरस्वती संस्थापक आर्य समाज 

  • सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिए।
  •  सब काम धर्मानुसार अर्थात् सत्य और असत्य को विचार करके करने चहिए।
  • संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है, अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना। सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य वर्तना चाहिए।
  • अविद्या का नाश और विद्या की वृद्धि करनी चाहिए।
  •  प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट न रहना चाहिए, बल्कि सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए।
  •  सब मनुष्यों को सामाजिक, सर्वहितकारी नियम पालने में परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी नियम पालने मे सब स्वतंत्र रहें।